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| 15401 | कान्ति | ना. | ४. सुन्दरी स्त्री। |
| 15402 | कान्ति | ना. | ५ दुर्गाको उपाधि। |
| 15403 | कान्ति | ना. | ६. चन्द्रमाका सोह्र कलामध्ये एक। |
| 15404 | कान्ति | ना. | ७. काव्यका दश गुणमध्ये रस उद्दीप्त गराउने एक गुण। |
| 15405 | कान्तिपुर | ना. | काष्ठमण्डप, काठमाडौँ। |
| 15406 | कान्तिपुरी | ना. | काठमाडौं। |
| 15407 | कान्तिपुरी | ना. | (उदा.- अमरावति कान्तिपुरी नगरी। - भानुभक्त।)। |
| 15408 | कान्तिमान् | वि. | १. कान्तियुक्त, दीप्ति भएको, उज्ज्वल शोभायुक्त, सुशोभि। |
| 15409 | कान्तिमान् | वि. | ना. २. चन्द्रमा। |
| 15410 | कान्दानी / कान्नानी | ना. | व्यञ्जनवर्णमा जोडिने आकारको मात्रा (); कान। |
| 15411 | कान्यकुब्ज | ना. | भारतको उत्तरी भागमा गङ्गाको सहायक नदीका किनारमा पर्ने एक प्राचीन नगर, वर्तमान कन्नौज। |
| 15412 | कान्लो | ना. | खेत, बारी आदिको वरिपरिको अग्लो डिल, पाटाको डिल, माटाको ढिस्कुरो, काँल्लो। |
| 15413 | काप | ना. | १. रुखको हाँगा फाटेर चोके परेको ठाउँ, कापो, अन्तर। |
| 15414 | काप | ना. | २. कुनै वस्तु दुईतीनतिरबाट फाटेर खोच परेको ठाउँ अक्कर। |
| 15415 | कापालिक | ना. | १. मानिसको खप्पर बोकेर हिँड्ने र रक्सी, मासु आदि खाने भैरव वा शक्तिका उपासक तान्त्रिक साधु। |
| 15416 | कापालिक | ना. | २. शरीरको छाला साह्रो, कालो र रुखो भएर फाट्ने एक प्रकारको कोर। |
| 15417 | कापालिक | ना. | ३. बङ्गालमा रहने पुरानो एक वर्णसङ्कर जाति। |
| 15418 | कापालिक | ना. | वि. ४. कपालसम्बन्धी; खप्परसम्बन्धी। |
| 15419 | कापिनु | अ.क्रि. | १. कापमा पर्नु चेपिनु, च्याप्टिनु। |
| 15420 | कापिनु | अ.क्रि. | २. दुई वस्तु वा समस्याका बिचमा अल्झिनु। |
| 15421 | कापी | ना. | १. धर्को भएको वा नभएको लेख्नका निम्ति प्रयोग हुने खाली कागतको पुस्तिका। |
| 15422 | कापी | ना. | २. पुस्तक, चित्र आदिको प्रति वा सङ्ख्या। |
| 15423 | कापी | ना. | ३. प्रतिलिपि, सरौट, नक्कल। |
| 15424 | कापी | ना. | ४. छाप्ने, छापिने आदि कामका निम्ति दिइने हस्तलेख। |
| 15425 | कापीराइट | ना. | लेखक, सङ्गीतकार वा कलाकारलाई कानुनले दिएको त्यो अधिकार जसअनुसार साहित्य, सङ्गीत वा कलाविषयक कुनै पनि कृति वा कार्यको प्रकाशन, उत्पादन र बिक्रीमा खास अवधिसम्मका लागि कानुनी सुरक्षा प्रदान गरिएको हुन्छ, लेखकाधिकार, स्वत्वाधिकार, प्रतिलिप्यधिकार, सर्वाधिकार। |
| 15426 | कापीराइट | ना. | यसको अन्तर्राष्ट्रिय चिह्न यस्तो (1) हुन्छ। |
| 15427 | कापुरुष | ना. | काँतर पुरुष, नीच वा तुच्छ व्यक्ति; पानीआन्द्रे मान्छे। |
| 15428 | कापे | ना. | १. पढ्दा वा पाठ गर्दा किताब राख्न सजिलो हुने गरी बनाइएको काठको एक प्रकारको चेपुवा खटिया। |
| 15429 | कापे | ना. | वि. २. कापो परेको काप भएको। |
| 15430 | काफर | वि. | हे. काँतर। |
| 15431 | काफल | ना. | लाम्चा पात हुने, गुच्छा गुच्छा राता साना फल फल्ने एक वृक्ष, त्यसैको गर्मी महिनामा फल्ने फल। |
| 15432 | काफलचरी | ना. | काफल पाक्ने बेलामा काफल पाक्यो' भनेर कराई हिँड्ने एक चरो। |
| 15433 | काफल पाक्यो | ना. | काफलचरीले काफल पाक्ने समयमा बोल्ने र त्यस्तै सुनिने स्वर। |
| 15434 | काफिर | ना. | १. ईश्वरको अस्तित्व नमान्ने मानिस। |
| 15435 | काफिर | ना. | २. मुसलमानी धर्म नमान्ने मानिस। |
| 15436 | काफिर | ना. | ३ दक्षिण अफ्रिकाका बान्टुभाषी जाति। |
| 15437 | काफिर | ना. | ४. अफगानिस्तानको सरहदमा बस्ने एक जाति। |
| 15438 | काफिर | ना. | वि. ५. नास्तिक। |
| 15439 | काफिर | ना. | ६. दुष्ट। |
| 15440 | काफिर | ना. | ७. निर्दय। |
| 15441 | काफी | ना. | चाहिएजति यथेष्ट मनग्य; पर्याप्त प्रशस्। |
| 15442 | काफी | ना. | १. खनायोका जस्ता झुप्पै झुप्पा राता रङका फल र चिउलीका जस्ता ठुलठुला पात हुने उष्णप्रदेशीय बिरुवा। |
| 15443 | काफी | ना. | २. त्यसैका साना साना बीजलाई यान्त्रिक प्रक्रियाद्वारा धुलो बनाएर तयार पारिने गाढा खैरो रङको र सुगन्धले युक्त एक प्रसिद्ध पेय पदार्थ कफी। |
| 15444 | काबिल | वि. | खास खास विषयको ज्ञाता, पढेलेखेको र योग्य, विद्वान्, पण्डित, शिक्षि। |
| 15445 | काबु | ना. | १. कुनै व्यक्तिको नियन्त्रण वा अधीनमा रहने काम, अधीनता; नियन्त्रण वश हैकम। |
| 15446 | काबु | ना. | वि. २. कायल, साबि। |
| 15447 | काबु | ना. | ३. चेतबाबा भएको, पछुतो मानेर कान समात्ने। |
| 15448 | काबुज | ना. | बट्टाई चरालाई राखिने पिंजडा। |
| 15449 | काबुल | ना. | १. उत्तरपूर्वी भागमा पर्ने अफगानिस्तानको राजधानी। |
| 15450 | काबुल | ना. | २. सिन्धुनदीमा गएर मिसिने अफगानिस्तानको एक नदी। |