|
|
|
|
|
|---|---|---|---|
| 1 | क | १. देवनागरी वर्णमालाको व्यञ्जनवर्णमध्ये पहिलो वर्ण; कण्ठस्थानबाट उच्चारण हुने, स्पर्शी, अल्पप्राण तथा अघोष ध्वनि, लेख्य रूपमा सो व्यञ्जनवर्णको प्रतिनिधित्व गर्ने लिपिचिह्न, कपुरी क। | |
| 2 | क | २. कुनै वस्तु, विषय वा कुराको वर्गीकरण वा मूल्याङ्कन गर्दा पहिलो वा उम्दा श्रेणीलाई छुट्याई चिनाउन प्रयोग गरिने श्रेणीबोधक अक्षरसङ्केत, लेखाइका क्रममा विषयको वर्गीकरण वा विभाजन उपविभाजनका निम्ति व्यञ्जनवर्णको प्रयोग गरिँदा दिइने क्रमबोधक पहिलो चिह्न। | |
| 3 | कँचिया | वि. | १. काँचोपन बाँकी रहेको; नपाकेको। |
| 4 | कँचिया | वि. | २. राम्ररी नसुकेको (रुख, दाउरा आदि)। |
| 5 | कँठिनी | वि . | १. काँठमा बस्ने, काँठमा घर हुने वा रहने (स्त्री)। |
| 6 | कँठिनी | वि . | ना. २. काँठे आइमाई, काँठे पुरुषकी पत्नी | |
| 7 | कँडारो | ना. | कामी र सर्किनीबाट जन्मेको सन्तान, कामीको तथाकथित तल्लो कोटि। |
| 8 | कँडारो | ना. | स्त्री. कँडानीं। |
| 9 | कँडाली | ना. | प्रायः पूजासामान, फलफूल, तरकारी र अरू सामान आदि हालिने, उभिन्डो भएको चोयाको वा धातुको भाँडो। |
| 10 | कँडेकेशरी | ना. | गुलाफको जस्तै पात हुने जङ्गली काँडे फूलको बोट | |
| 11 | कँडेचमेली | ना. | बोटमा काँडा भएको, कनिकाजस्ता पात हुने, चमेलीको जस्तै बास्ना आउने र सेतो रङ्गको फूल फुल्ने एक जातको चमेली फूल वा त्यसको बोट। |
| 12 | कँडेल | ना. | विभिन्न रङ्गका फूल फुल्ने, एक बित्तासम्मको लामो र करिब एक अङ्गुल चौडा पात हुने बिखालु बोट, करवीर। |
| 13 | कँडेल | ना. | २. नेपालीहरूको एउटा थर। |
| 14 | कँधेउली | ना. | दुवैपट्टि भारी झुन्ड्याएर काँधमा बोक्ने काठ वा बाँस आदिको घोचो; नोल | |
| 15 | कँधेरी | ना. | काँधमा भिर्ने वस्त्र काँधे। |
| 16 | कँधेली | ना. | कँधेरी कँधेउली। |
| 17 | कँध्याइ | ना. | काँधिने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया | |
| 18 | कँध्याइनु | क. क्रि. | १. काँधिने पारिनु, काँधिन लाइनु। |
| 19 | कँध्याइनु | क. क्रि. | २. मोटाइनु। |
| 20 | कँध्याउनु | प्रे. क्रि. | १. काँधिने पार्नु। |
| 21 | कँध्याउनु | प्रे. क्रि. | २. मोटो बनाइनु। |
| 22 | कँध्याहा | वि. | १. भैझगडा आदिमा एक पक्षलाई बहकाएर अर्को पक्षका विरुद्ध उचाल्ने, बोकाहा। |
| 23 | कँध्याहा | वि. | २. काँधे; कँधेरी | |
| 24 | कँपाइ | ना. | काँप्ने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया, कम्पन | |
| 25 | कँपाइनु | क. क्रि. | काँप्न लगाइनु काँप्ने पारिनु, कम्प गराइनु। |
| 26 | कँपाउनु | प्रे. क्रि. | काँप्ने वा थरथराउने पार्नु, कम्प गराउनु, कमाउनु। |
| 27 | कँवर | ना. | १. कनफट्टा जोगीको कर्म नचलेको अर्थात् कान नचिरेको सन्तति। |
| 28 | कँवर | ना. | २. हे. कुँवर। |
| 29 | कंस | ना. | १. भारतको मथुरा प्रदेशमा राज्य गर्ने उग्रसेनका छोरा वा कृष्णका मामाको नाम। |
| 30 | कंस | ना. | वि. २. दुर्जन, अत्याचारी। |
| 31 | कउल ू | ना. | आगाको भरभराउँदो फिलिङ्गो, अँगेठ; भुङ्ग्रो। |
| 32 | कउल | ना. | हे. कवल। |
| 33 | ककड़ी | ना. | चिन्चिडो वा लामो घिरौंलाजस्तो, काँक्राको जातो, प्राय: गर्मी समयमा बालुवाप्रधान चिसमिरो जमिनमा फल्ने फल; लम्काँक्री। |
| 34 | ककनन | ना. | अध्ययन; पढाइ। |
| 35 | ककनन गर्नु | टु. | राम्ररी बाच्न वा पढ्न नसकी कनीकनी पढ्नु। |
| 36 | ककनी | ना. | १. तराई प्रदेशका स्त्रीजातिले नाडीमा लगाउने काँस वा पित्तलको चुराका आकारको गहना। |
| 37 | ककनी | ना. | २. पानीको धारो वा त्यस्तो धारो भएको ओस्याइलो ठाउँ। |
| 38 | ककनी | ना. | ३. काठमाडौंको उत्तरपश्चिममा रहेको एक दर्शनीय स्थल | |
| 39 | ककनो | ना. | चुरो, बाला। |
| 40 | ककरी | ना. | ककडी। |
| 41 | करीमकरी | ना. | मकै, भटमास आदि सामान्य खानेकुरा। |
| 42 | ककस | सर्व. | १. 'कोको' को तिर्यक् रूप (उदा.- ककसले काम गरे, मलाई सुनाऊ)। |
| 43 | ककस | सर्व. | २. 'कसकस' को संक्षिप्त रूप। |
| 44 | कका | ना. | चङ्गामा ओजन मिलाई राम्ररी उडाउन बिचको कप्टेराको सिरान र पुछारमा बाँधिएको धागाको उभिन्डो। |
| 45 | ककार | ना. | क' वर्ण, नेपाली वर्णमालाको पहिलो व्यञ्जनवर्ण। |
| 46 | ककार | ना. | ककुद- ना. [सं.] १. पहाडको टाकुरो, शिखर। |
| 47 | ककार | ना. | २. साँढेको जुरो। |
| 48 | ककार | ना. | ३. राजचिहन। |
| 49 | ककुम | ना. | १. वीणाको घुमेको दण्ड। |
| 50 | ककुम | ना. | २. अर्जुन वृक्ष, काउलो। |