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| 85101 | शब्द | ना. | अनुभूत विषयवस्तुलाई व्यक्त गरिने वर्णात्मक वा ध्वन्यात्मक ध्वनि, आवाज। |
| 85102 | शब्द | ना. | २. वर्ण वा वर्णसमूहबाट बनेको कुनै अर्थ बुझाउने ध्वनि, सार्थक पद, लबज। |
| 85103 | शब्दकोश | ना. | कुनै भाषाका शब्दहरूको वर्णक्रमअनुसार शब्द सङ्कलन गरी व्याकरणात्मक कोटि आदि खुलाएर उही वा अन्य भाषामा अर्थ, पर्याय, विशेषता आदि लेखिएको ग्रन्थ, अभिधान। |
| 85104 | शब्दकोष | ना. | शब्दकोश। |
| 85105 | शब्दचित्र | ना. | साहित्यमा कर्णमधुर वा चमत्कार उत्पन्न गर्ने शब्द प्रयोग हुने यमक, अनुप्रास आदि शब्दालङ्कार। |
| 85106 | शब्दचित्र | ना. | २. अक्षरहरूको रखाइद्वारा कुनै जीव वा वस्तुको वर्णनचित्र तयार पारिने साहित्यिक रचना (खड्ग, मुख आदि बन्ध)। |
| 85107 | शब्दचित्र | ना. | ३. प्रत्यक्ष देखे झैं गरी कुनै व्यक्ति, वस्तु वा घटनाको वर्णन गरिने साहित्यिक लेखन वा शैली। |
| 85108 | शब्दजाल | ना. | शब्दको थोपरथापर, शब्दाडम्बर। |
| 85109 | शब्दप्रमाण | ना. | कसैले भनेको वा लेखेको शब्दका आधारमा अडेको वा लिइएको प्रमाण। |
| 85110 | शब्दब्रह्म | ना. | शब्दमा निहित वा शब्दरूपमा विद्यमान ब्रह्म आत्मा वा परमात्मासम्बन्धी आध्यात्मिक ज्ञान। |
| 85111 | शब्दब्रह्म | ना. | (शब्द नै ब्रह्म हो, सृष्टि हो र त्यही नै ब्रह्मका रूपमा नित्य रहिरहन्छ भन्ने ब्रह्मवादीहरूको सिद्धान्त छ )। |
| 85112 | शब्दभेद | ना. | ध्वन्यात्मक, व्यक्तवर्णात्मक र अनुकरणात्मक रूपबाट हुने शब्दका तीन भेद। |
| 85113 | शब्दभेदी | वि. | नदेखिने वा अँध्यारो ठाउँबाट आएको शब्दका भरमा नै निसाना लगाउने (बाण वा व्यक्ति )। |
| 85114 | शब्दयोजना | ना. | कुनै वाक्य वा रचनामा उचित शब्द राख्ने वा प्रयोग गर्ने काम। |
| 85115 | शब्दयोजना | ना. | २. त्यसरी राखिएका शब्दहरूको क्रम। |
| 85116 | शब्दविद्या | ना. | शब्दको उत्पत्ति, रूप, संरचना, भेद आदिको ज्ञान गराउने विद्या,शब्दशास्त्र। |
| 85117 | शब्दवेधी | वि. | शब्दभेदी। |
| 85118 | शब्दश्लेष | ना. | दुई वा धेरै चमत्कारपूर्ण अर्थ दिने गरी कुनै ठाउँमा एउटै शब्द प्रयुक्त हुने काम। |
| 85119 | शब्दशास्त्र | ना. | शब्दविद्या, व्याकरण। |
| 85120 | शब्दशुद्धि | ना. | शब्दको शुद्धता। |
| 85121 | शब्दसाधन | ना. | शब्दहरूको व्युत्पत्ति, भेद, रूपान्तर आदि देखाइने व्याकरणको अङ्ग वा भाग। |
| 85122 | शब्दाक्षर | ना. | प्रणव, ॐ। |
| 85123 | शब्दाडम्बर | ना. | सामान्य कुरा प्रकट गर्दा पनि अप्रचलित तथा कठिन शब्द र लामालामा वाक्यहरू प्रयोग गरिने काम वा ढाँचा,शब्दजाल, एक प्रकारको उदात्तविरोधी तत्त्व। |
| 85124 | शब्दातीत | वि. | शब्दद्वारा भेट्न वा भन्न नसकिने,वर्णनाती। |
| 85125 | शब्दानुशासन | ना. | शब्दको शुद्धि, अर्थ, भेद आदिको ज्ञान गराउने शास्त्र, व्याकरण। |
| 85126 | शब्दान्वय | ना. | वाक्यमा प्रयुक्त शब्दका वचन, लिङ्ग, काल आदिको भेद छुट्ट्याउने र अन्य शब्दका साथ रहेको सम्बन्ध देखाउने काम। |
| 85127 | शब्दार्थ | ना. | शब्द र त्यसको अर्। |
| 85128 | शब्दार्थ | ना. | २. शब्दको प्रचलित तथा सामान्य अर्। |
| 85129 | शब्दार्थतत्त्व | ना. | शब्दार्थको मूल अभिप्राय वा लक्षण। |
| 85130 | शब्दार्थतात्त्विक | वि. | शब्दार्थतत्त्वसम्बन्धी। |
| 85131 | शब्दालङ्कार | ना. | साहित्यमा शब्दालङ्कार र अर्थालङ्कार दुई भेदमध्ये एक, शब्द वा वर्णनको चमत्कारको प्रधानता भएको र त्यसैबाट माधुर्य उत्पन्न हुने अलङ्कार (यमका, अनुप्रास आदि)। |
| 85132 | शब्दावली | ना. | कुनै भाषा वा बोलीमा प्रयुक्त हुने खासखास विषय वा कार्यसित सम्बन्धित शब्दहरूको सूची। |
| 85133 | शब्दावली | ना. | २. कुनै वाक्यरचना आदिमा प्रयोग भएका शब्दहरूको प्रकार तथा क्रम। |
| 85134 | शब्दाश्रित | वि. | शब्दमा आश्रित हुने वा अडने। |
| 85135 | शब्दाश्रित निपात | ना. | कुनै शब्दमा आश्रित भएर मात्र प्रयुक्त र अर्थवान् हुने निपात (त, न, नि, नै, पो आदि)। |
| 85136 | शम | ना. | मानसिक स्थिरता वा आनन्द, शान्ति। |
| 85137 | शम | ना. | २. मन शान्त पार्ने काम, इन्द्रिय तथा अन्तःकरणको संयम। |
| 85138 | शम | ना. | ३. शान्तरसको स्थायी भाव। |
| 85139 | शम | ना. | ४. माफ दिने काम, क्षमा। |
| 85140 | शमता | ना. | शम हुनाको भाव, गुण वा धर्म। |
| 85141 | शमन | ना. | कुनै बाधा, विकार, उपध्रो आदिलाई शान्त पार्ने काम, शान्ति। |
| 85142 | शमन | ना. | २. यमराज। |
| 85143 | शमन | ना. | ३. कुनै कुराको अन्त्य, समाप्ति। |
| 85144 | शमनी | ना. | रात, रात्रि। |
| 85145 | शमनीय | वि. | शमन गर्न सकिने, शमन हुने। |
| 85146 | शमशेर | ना. | हे. समसेर। |
| 85147 | शमित | वि. | शमन गरिएको वा भएको शान्। |
| 85148 | शमित | वि. | २. दबाइएको, दमि। |
| 85149 | शमी | ना. | टुप्पो तिखो नभएका चिल्ला हरिया पात हुने, विवाह आदि कार्यमा तथा यज्ञका निम्ति हाँगाबिंगा अरणी बनाएर आगो निकाल्न प्रयोग गरिने एक जातको रुख वा त्यसैको काठ। |
| 85150 | शम्पा | ना. | ओखलमा हिर्काउँदा आगो निकाल्ने भाँडो (यसो गर्दा राक्षसहरू भाग्छन् भन्ने किंवदन्ती छ)। |