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| 8151 | ख्वापख्वाप | क्रि.वि. | नरोकिईकन (कुनै खाद्य वस्तु मुखमा हाल्ने किसिम); क्वापक्वाप। |
| 8152 | ख्वापख्वापती/ख्वापख्वापी | क्रि.वि. | अझै छिटो ख्वापख्वाप हुने गरी। |
| 8153 | ख्वाप्प | क्रि.वि. | १. एकैचोटि (कुनै डल्लो खाद्य वस्तु मुखमा हाल्ने किसिम); क्वाप्प। |
| 8154 | ख्वाप्प | क्रि.वि. | २. कुनै तिखो वस्तु रोपिने वा पस्ने गरी। |
| 8155 | ख्वामित | ना. | १. सम्मानबोधक शब्द; श्रीमान्। |
| 8156 | ख्वामित | ना. | २. मालिक; प्रभु, स्वामी। |
| 8157 | ख्वाम्म | क्रि.वि. | पिँधसम्म पुग्ने गरी (कुनै तिखो वस्तु रोप्ने किसिम); स्वाम्म। |
| 8158 | ख्वाम्लाड्ड | क्रि.वि. | चालै नपाई, एक्कासि (खाल्टामा पर्ने किसिम)। |
| 8159 | ख्वारख्वार | क्रि.वि. | नरोकिईकन; स्वारस्वार। |
| 8160 | ख्वारख्वारी/ख्वारख्वार्ती | क्रि.वि. | नरोकिईकन; स्वाटस्वाटी। |
| 8161 | ख्वार्र | क्रि.वि. | १. छिटो छिटो चालसँग; नरोकीकन (दगुर्ने वा हिँड्ने किसिम )। |
| 8162 | ख्वार्र | क्रि.वि. | २. गेडाहरू झर्ने वा पोखिने गरी; स्वार। |
| 8163 | ख्वालख्वाल | क्रि.वि. | कत्ति पनि नरोकिईकन पानी आदि पन्यालो पदार्थ बग्ने वा पोखिने किसिम; वालवाल। |
| 8164 | ख्वालख्वाली/ख्वालख्वाल्ती | क्रि.वि. | अझ तिखो रूपमा ख्वालख्वाल हुनेगरी। |
| 8165 | ख्वाले | वि. | १. नचाहिँदो हल्ला गर्ने। |
| 8166 | ख्वाले | वि. | २. असभ्य; गँवार। |
| 8167 | ख्वाल्ल | क्रि.वि. | एकै बाजि खनिएर; नरोकिईकन (पानी आदि बग्ने वा पोखिने किसिम); वाल्ल। |
| 8168 | ख्वास्स | क्रि.वि. | थाहै नपाईकन; नचिताएको ढाँचाले; बिस्तारै हाल्ने, हुल्ने वा घुसाउने गरी, ह्वास्स। |
| 8169 | ग | १. देवनागरी वर्णमालाको व्यञ्जनवर्णमध्ये तेस्रो व्यञ्जनवर्ण; कण्ठस्थानबाट उच्चारण हुने, स्पर्शी, घोष, अल्पप्राण व्यञ्जनवर्ण; कवर्गको तेस्रो वर्ण; लेख्य रूपमा सो व्यञ्जनवर्णको प्रतिनिधित्व गर्ने लिपिचिह्न; गाइगोडे ग। | |
| 8170 | ग | २. कुनै वस्तु, विषय वा कुराको वर्गीकरण या मूल्याङ्कन गर्दा तेस्रो वा निम्न श्रेणीलाई छुट्याई चिनाउन प्रयोग गरिने श्रेणीबोधक अक्षरसङ्केत; लेखाइका क्रममा विषयवस्तुको वर्गीकरण वा विभाजन उपविभाजनका निम्ति व्यञ्जनवर्णको प्रयोग गरिँदा दिइने क्रमबोधक तेस्रो चिह्न। | |
| 8171 | गँगटे | ना. | हातका औँलामा लगाइने घुम्रिएको औँठी; मुन्द्री मुन्द्रो। |
| 8172 | गँगटो | ना. | हिँड्नका लागि आठवटा खुट्टा हुने र च्याप्न र आफ्नो रक्षा गर्नका लागि दुईवटा सुँडजस्ता काँडादार अङ्ग हुने, पानीका छेउछाउका काप र ढाँडहरूमा बस्ने जलजीवी प्राणी। |
| 8173 | गँगरिनु | अ.क्रि. | जाडो वा चिसोले शरीरका अङ्गहरू कठ्याङ्ग्रिनु, गँगर्किनु; अररिनु। |
| 8174 | गँगर्किनु | अ.क्रि. | जाडो वा चिसोले कठ्याङ्ग्रिनु, गँगरिनु। |
| 8175 | गँगर्क्याइ | ना. | गँगर्किने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया। |
| 8176 | गँगर्क्याइनु | क.क्रि. | जाडोले कक्रक्क पारिनु, गँगऱ्याइनु। |
| 8177 | गँगर्क्याउनु | प्रे.क्रि. | जाडोले कक्रक्क पार्नु, परिस्थितिले गँगऱ्याउनु। |
| 8178 | गँगऱ्याइ | ना. | गँगरिने किसिम, क्रिया वा प्रक्रिया। |
| 8179 | गँगऱ्याइनु | क.क्रि. | जाडोले कक्रक्क पारिनु, गँगर्क्याइनु। |
| 8180 | गँगऱ्याउनु | स.क्रि. / प्रे.क्रि. | १. जाडोले कक्रक्क पार्नु, गँगर्व्याउनु। |
| 8181 | गँगऱ्याउनु | स.क्रि. / प्रे.क्रि. | २. गँगरिन लाउनु। |
| 8182 | गँगौटी | ना. | १. गङ्गाको स्पर्शले पखालिएर पवित्र भएको माटो। |
| 8183 | गँगौटी | ना. | २. नदीका किनारको माटो; गङ्गामाटी। |
| 8184 | गँजडी | वि. | गाँजा खाने बानी भएको; गाँजाको अम्मली; गँज्याहा। |
| 8185 | गँजौटो | ना. | एक हातको पन्जामा अटाउन सक्नेसम्मको नापो; एक पसरको परिमाण। |
| 8186 | गँज्याहा | वि. | गाँजाको अम्मली; गँजडी। |
| 8187 | गँडास | ना. | काठको आधारमा अड्याइएको, सुपारी काट्ने सरौतोजस्तो बिँड भएको, पराल, घाँस आदि काटेर भुसा बनाउने हतियार; तराईतिर घाँसबाट भुसा तयार पार्ने सरौताका आकारको हतियार। |
| 8188 | गँडासो | ना. | दाउरा, मुढा, काठपात, घाँस आदि काट्ने काममा प्रयोग गरिने बिंड भएको हतियार। |
| 8189 | गँडाहा | वि. | गाँड भएको वा गाँड उम्रेको; गँडोहो; गँड्याहा। |
| 8190 | गँडेउलो | ना. | १. वर्षाकालमा झरीका बेला बग्रेल्ती निस्कने, गोबर, मलको रास वा चिसो माटोमा घुस्रिएर बस्ने, प्राणीका पेटको जुकाजस्तो हाड नभएको, लगभग एक बित्तासम्म लमाइ हुने, तामो जस्तै रङको, राती टल्कने र सर्प झैँ घस्रिने कृमिवर्गको एक किरो; गँडेउलो; बस्र्यौलो। |
| 8191 | गँडेरो | ना. | १. हिलोमा बस्न रुचाउने सानो खालको माछो। |
| 8192 | गँडेरो | ना. | २. गण्डकी नदीमा पाइने सोही जातको तर ठुलो आकारको माछो; राइगँडेरो। |
| 8193 | गँडेला | ना. | दुब्लो र पातलो देखिने साखिने खालको एक जातको माछो। |
| 8194 | गँडोहो | वि. | गाँड भएको; गँडाहा। |
| 8195 | गँड्याहा | ना. | गाँड भएको वा गाँड उम्रेको; गँडोहो; गँड्याहा। |
| 8196 | गँड्यौलो | ना. | १. वर्षाकालमा झरीका बेला बग्रेल्ती निस्कने, गोबर, मलको रास वा चिसो माटोमा घुस्रिएर बस्ने, प्राणीका पेटको जुकाजस्तो हाड नभएको, लगभग एक बित्तासम्म लमाइ हुने, तामो जस्तै रङको, राती टल्कने र सर्प झैँ घस्रिने कृमिवर्गको एक किरो; गँडेउलो; बस्र्यौलो। |
| 8197 | गँथाइ | ना. | गाँने भाव, क्रिया वा प्रक्रिया | |
| 8198 | गँधारा | ना. | मसिना खुट्टा हुने र अलि अलि उड्ने, विभिन्न रङ भएको, छोइदिँदा ठस्स गनाउने खालको, प्रायः धानमा लाग्ने रोगाणु जातको किरो; पतेरो। |
| 8199 | गँधे | ना. | सखरखण्डका आकारका पात हुने, जरामा सखरखण्डकै जस्तो कन्द फल्ने, त्यसै फललाई थेबे झैँ कुटेर अचार खाइने, कडा गन्ध भएको एक जातको झार; गँदे। |
| 8200 | गँवार | वि. | १. सहरिया सभ्यतादेखि टाढै बसेको वा भएको गाउँको बासिन्दा; गाउँले। |