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| 11201 | चतुर् | ना. | १. चारको सङ्ख्या । |
| 11202 | चतुर् | ना. | २. समास भएका शब्दमा चार भन्ने अर्थ बुझाउने पूर्वपद (चतुर्गण, चतुर्युग, चतुर्वर्ण इ.) । |
| 11203 | चतुर | वि. | १. चलाक, होसियार, बाठो, चनाखो; चतुरो; कुशल, मेधावी, सिपालु । |
| 11204 | चतुर | वि. | २. फुर्तिलो, छिटोछरितो । |
| 11205 | चतुर | वि. | ३. सुन्दर, प्रिय । |
| 11206 | चतुरङ्गिणी | ना. | १. हात्ती, घोडा, रथ र पैदल चार अङ्गद्वारा सुसज्जित फौज । |
| 11207 | चतुरङ्गिणी | ना. | २. पासाको खेल । |
| 11208 | चतुराइ | ना. | चतुरो हुनाको भाव, गुण वा अवस्था, बठ्याइँ, चातुर्य, चलाकी । |
| 11209 | चतुरानन | वि. | १. चार मुख भएको । |
| 11210 | चतुरानन | वि. | ना. २. ब्रह्मा । |
| 11211 | चतुराश्रम | ना. | वर्णाश्रम व्यवस्थाअनुसार जीवनका चार अवस्था (ब्रह्मचर्य, गार्हस्थ, वानप्रस्थ र सन्न्यास) । |
| 11212 | चतुरो | वि. | हे. चतुर । |
| 11213 | चतुर्थ | वि. | चौथो, चारौं । |
| 11214 | चतुर्य खण्ड | ना. | भूगर्भशास्त्रमा जीव कल्पको विभाजनमा पर्ने समयको चौथो खण्ड, नवजीवनका समयको विभाजनका तृतीय खण्डपछि आउने अन्तिम खण्ड | |
| 11215 | चतुर्य हिमयुग | ना. | पुरातत्त्वशास्त्रअनुसार आजभन्दा असी हजार वर्षपहिले प्रारम्भ भएको हिमयुग, तृतीय हिमानी वा तृतीय हिमयुगभन्दा पछिको हिमयुग, चार हिमयुग वा चार हिमानीमध्ये अन्तिम हिमयुग । |
| 11216 | चतुर्थांश | ना. | चौथाइ, चौथो भाग, चौथाइ भाग । |
| 11217 | चतुर्थांशक | ना. | कुल पुनरावृत्तिलाई चार भागमा बाँड्ने विचारको मान। |
| 11218 | चतुर्याश्रम | ना. | वर्णाश्रम व्यवस्थाअनुसार जीवनका चार अवस्थामध्ये अन्तिम आश्रम; सन्न्यास आश्रम । |
| 11219 | चतुर्थी | ना. | १. चान्द्रमानका हिसाबले कृष्ण वा शुक्लपक्षको चारौं दिन, चौथी । |
| 11220 | चतुर्थी | ना. | २. माङ्गलिक कार्यको उद्यापन, साड्गे । |
| 11221 | चतुर्थी | ना. | ३. व्याकरणमा 'लाई' विभक्ति हुने एक चिह्न | |
| 11222 | चतुर्थी कर्म | ना. | विवाह आदि शुभकार्यका अवसरमा गरिने चौथो दिनको कार्य | |
| 11223 | चतुर्दन्त | वि. | १. चारवटा दाँत उम्रेको; चार दाँते (हात्ती) । |
| 11224 | चतुर्दन्त | वि. | ना. २. ऐरावत हात्ती । |
| 11225 | चतुर्दश | ना. | १. चौधको सङ्ख्या । |
| 11226 | चतुर्दश | ना. | वि. २. चौध; चौधौं । |
| 11227 | चतुर्थी भुवन | ना. | पृथ्वीभन्दा माथिका सात लोक (भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक र सत्यलोक) र पृथ्वीभन्दा तलका सात लोक (तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल र पाताल) गरी जम्मा चौध लोक । |
| 11228 | चतुर्थी विद्या | ना. | चौध विद्या वा शास्त्र (चार वेद ऋग, यजु, साम, अथर्व वेदका छ अङ्ग- शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष र छन्द, अनि मीमांसा, न्याय, धर्मशास्त्र र पुराण) । |
| 11229 | चतुर्दशी | ना. | चान्द्रमासका हिसाबले शुक्ल वा कृष्ण पक्षको चौधौं दिन, औंसी वा पूर्णिमाको अघिल्लो दिन । |
| 11230 | चतुर्दिक् | ना. | चार दिशा (पूर्व, दक्षिण, पश्चिम र उत्तर ) । |
| 11231 | चतुर्द्वार | वि. | १. चार ढोका भएको, चार ढोके । |
| 11232 | चतुर्द्वार | वि. | ना. २. चार दिशामा चारैवटा ढोका भएको घर । |
| 11233 | चतुर्बाहु | ना. | विष्णु, नारायण, चतुर्भुज । |
| 11234 | चतुर्भुज | ना. | १. चतुर्बाहु । |
| 11235 | चतुर्भुज | ना. | २. रेखागणितमा वर्ग, आदिका एक अर्कामा मिलेर चार कोण बन्ने सरल रेखा । |
| 11236 | चतुर्भुज | ना. | वि. ३. चार भुजा भएको (क्षेत्र आदि) । |
| 11237 | चतुर्मास | ना. | १. आषाढ शुक्ल एकादशीदेखि कार्तिक शुक्ल एकादशीसम्मको चार महिना; चौमासा । |
| 11238 | चतुर्मास | ना. | २. ती महिनाहरूमा गरिने विभिन्न धार्मिक कार्य | |
| 11239 | चतुर्मुख | ना. | १. ब्रह्मा । |
| 11240 | चतुर्मुख | ना. | वि. २. चार मुख भएको, चतुरानन । |
| 11241 | चतुर्मुख | ना. | चतुइँ- ना. [चतुरो +याइँ] चतुरो हुनाको भाव, गुण वा अवस्था । |
| 11242 | चतुर्याइँ | ना. | चतुरो हुनाको भाव, गुण वा अवस्था । |
| 11243 | चतुर्युग | ना. | सत्य, त्रेता, द्वापर र कलियुग । |
| 11244 | चतुर्वर्ग | ना. | मानव जीवनका चार पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम र (मोक्ष) । |
| 11245 | चतुर्वर्ण | ना. | वर्णाश्रम वा सनातनी समाजका चार श्रेणी (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य र शूद्र ) । |
| 11246 | चतुर्विद्या | ना. | त्रयी र अथर्व वेद अर्थात् ऋग्, यजु, साम र अथर्ववेद; चतुर्वेद | |
| 11247 | चतुर्वेद | ना. | १. ऋग्, यजु, साम र अथर्व वेद, चतुर्विद्या । |
| 11248 | चतुर्वेद | ना. | वि. २. चारै वेदसँग परिचित भएको; चारै वेदको ज्ञाता । |
| 11249 | चतुर्वेदी | ना. | १. चारै वेदको ज्ञाता । |
| 11250 | चतुर्वेदी | ना. | २. ब्राह्मण वर्गको एक थर । |